जोधपुर-जैसलमेर की सस्ती यात्रा कैसे करें?

यदि आप नियमित रूप से मेरा ब्लॉग पढ़ते हैं, तो यह सब बताने की आवश्यकता नहीं है… क्योंकि आप यह सब अच्छी तरह जानते भी हैं और आपमें से सैकड़ों मित्र इस यात्रा को या किसी अन्य यात्रा को ब्लॉग में देखकर काफी सस्ते में करके आए भी हैं… फिर भी हमारा कर्तव्य बनता है कि हम आपको घुमक्कड़ी के लिए प्रोत्साहित करते रहें…

तो अगर आप जोधपुर-जैसलमेर जाना चाहते हैं, तो यह ध्यान रखें कि केवल दिसंबर या जनवरी में ही जाएँ… क्योंकि यह एक शुष्क क्षेत्र है, इसलिए बाकी समय में गर्मी जबरदस्त होती है… वैसे नवंबर और फरवरी में भी आपको सुबह-शाम अच्छी-खासी ठंड मिलेगी, लेकिन दिन में भयानक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है… और अगर आपको किसी तूफानी कीड़े ने काटा है, तो आप मार्च से अक्टूबर तक भी घूमकर आ सकते हैं…



आप अपनी 5 दिन की यात्रा कुछ इस तरह डिजाइन कर सकते हैं:

दिन-1: दिल्ली से शाम को मंडोर एक्सप्रेस पकड़कर सुबह तक जोधपुर पहुँच जाइए… और पूरे दिन जोधपुर के विभिन्न दर्शनीय स्थान देखिए… इसके लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का भी सहारा ले सकते हैं और पूरे दिन के लिए टैक्सी या रिक्शा भी कर सकते हैं… शाम तक वापस रेलवे स्टेशन आ जाइए और जैसलमेर जाने वाली ओवरनाइट ट्रेन पकड़ लीजिए…

दिन-2: सुबह जैसलमेर उतरकर जैसलमेर शहर के दर्शनीय स्थान देखिए… जैसलमेर का किला देखिए… हवेलियाँ देखिए… झील देखिए… और शाम को अपने बजट में कोई होटल लेकर सो जाइए… कौन-सा होटल अच्छा है, कौन-सा सस्ता है, कौन-सा नजदीक है, कौन-सा दूर है – यह सब जानकारी आपको गूगल मैप पर मिल जाएगी… गूगल मैप पर होटल के फोटो मिल जाएँगे… होटल का फोन नंबर मिल जाएगा… बात कीजिए… मोलभाव कीजिए और बुक कर लीजिए…

दिन-3: आज जैसमलेर के आसपास घूमिए… वो एक भुतहा गाँव है – कुलधरा… वहाँ जाइए एकदम मस्त बेफिक्र होकर… घरों के अंदर जाइए… ऊपर छतों पर चढ़िए… और कोई भूत दिखे, तो मेरी रामराम भी कह देना… जब मैं गया था, तो दिन का समय था और दिन में भूत नहीं दिखते… हो सके, तो उधर रात को भी रुक जाना… कुलधरा में ठहरने की कोई सुविधा नहीं है, लेकिन आसपास एक-दो अच्छे होटल हैं…
इसके अलावा लोद्रवा चले जाइए… और शाम को खुड़ी चले जाना… खुड़ी में बड़े-बड़े सैंड ड्यून्स हैं… रेत के धोरे… कैमल सफारी का आनंद लीजिए… जीप सफारी का आनंद लीजिए… मन करे तो जैसलमेर लौट आइए और मन करे तो खुड़ी में ही रुक जाइए… रुकने की उत्तम व्यवस्था है उधर…
जैसलमेर से इन स्थानों के लिए बस सर्विस ज्यादा अच्छी नहीं है… बस की टाइमिंग का पता करके ही जाना…

दिन-4: आज निकलिए तनोट के लिए… जैसलमेर से 100-150 किलोमीटर दूर… एकदम भारत-पाकिस्तान सीमा के पास… यहाँ माता का एक मंदिर है, जिसकी देखरेख बी.एस.एफ. करती है… सुबह-शाम यहाँ आरती जरूर देखिए… हमारे जवान अपने घर से दूर रहकर कितने जोश से आरती करते हैं, वह दर्शनीय है… आप चाहें तो यहाँ रात भी रुक सकते हैं… मंदिर की धर्मशाला है… सारी कमान बी.एस.एफ संभालती है… मतलब कि यह धर्मशाला हरिद्वार वाली धर्मशालाओं जैसी नहीं है… साफ-सुथरी और व्यवस्थित है यह… रुकना एकदम फ्री है… भोजन भी यहीं पर बन जाता है, लेकिन उसके पैसे लगते हैं…
लोंगेवाला जाए बिना इधर की यात्रा अधूरी है… तनोट से लोंगेवाला का रास्ता रेत के विशाल धोरों के बीच से होता हुआ जाता है… लोंगेवाला का युद्ध इतिहास-प्रसिद्ध है… इसी पर आधारित ’बॉर्डर’ फिल्म बनी है… आपको अगर इस फिल्म की कहानी पता हो, तो यह जान लीजिए कि वह सच्ची घटना पर आधारित है और वह युद्ध यहीं लोंगेवाला में हुआ था… यहाँ शहीदों को याद कीजिए और पाकिस्तानी टैंक पर चढ़कर फोटो खिंचवाइए…
लेकिन याह रखिए कि इस मार्ग पर न के बराबर बसें चलती हैं… कई साल पहले जोधपुर-तनोट बस चलती थी… अब चलती है या नहीं, पता नहीं… जैसलमेर से रामगढ़ के बीच तो अनगिनत बसें हैं, लेकिन रामगढ़ से तनोट और लोंगेवाला के बीच शायद ही कोई बस चलती हो… और हाँ, रामगढ़ से याद आया… यहाँ खाने-पीने की कई दुकानें हैं… समोसे, पकौड़े और मिर्ची-बड़े जरूर खाना…

दिन-5: आज का दिन सम और धनाना के लिए रखिए… इस मार्ग पर बसें चलती हैं, लेकिन टाइमिंग पता कर लेना… सम तो बड़ा फेमस है… आप वे जो सैंड ड्यून्स के फोटो देखते हो, वे ज्यादातर सम के ही होते हैं… यहाँ रुकने की कोई तंगी नहीं है… आप जैसे ही बस से उतरेंगे, आपको घेर लिया जाएगा… अच्छे-खासे रेट बताए जाएँगे… लेकिन आप जमकर मोलभाव करना… यहाँ कैमल सफारी, जीप सफारी खूब होते हैं… आप सभी में मोलभाव करना… सनसेट और सनराइज तो जरूर ही देखना… और अगर चाँदनी रात हो, तो इसका भी आनंद लेना…
सम से 30-40 किलोमीटर आगे धनाना वो जगह है, जहाँ तक हम सिविलियन जा सकते हैं… धनाना से सीमा 15 किलोमीटर दूर है, लेकिन सिविलियन को जाने की अनुमति नहीं है… सम से धनाना के रास्ते में भयंकर बड़े-बड़े सैंड ड्यून्स मिलते हैं… धनाना में भी सैंड ड्यून्स हैं… बी.एस.एफ. की एक चौकी रेत में दबी हुई है, उसे देखने जरूर जाना… इसके लिए आधा किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा…



अगर आपके पास अपनी गाड़ी है या बाइक है, तो इससे अच्छा कुछ नहीं… शानदार सड़कें बनी हैं… आप स्वयं भी ड्राइव करके जा सकते हैं… सारे रास्ते और होटल गूगल मैप पर उपलब्ध हैं… स्वयं थोड़ा-सा होमवर्क कीजिए और काफी सस्ते में यात्रा करके आइए…

लेकिन याद रखना… 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक का समय जहाँ आपके लिए छुट्टियों का समय होता है, वहीं उनके लिए भी पीक सीजन होता है और होटल वाले अपने रेट बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं… इसके बावजूद भी सभी होटल और कैंप फुल रहते हैं और कई बार लोगों को जगह भी नहीं मिलती… इसलिए अगर आप इसी पीरियड में जा रहे हैं, तो हर जगह होटल पहले से बुक करके जाएँ… खासकर सम में तो जरूर पहले से ही बुक करें…


यदि आप ये सब झंझट नहीं करना चाहते हैं, तो हम बैठे हैं… हमारे साथ जोधपुर-जैसलमेर घूमिए और गाड़ी, होटल व दर्शनीय जगहों के झंझटों से मुक्त रहिए… मैं व्यक्तिगत रूप से पीक टाइम पर यात्रा नहीं करना चाहता हूँ, लेकिन कुछ मित्रों के आग्रह पर हमने पीक टाइम को भी ध्यान में रखा है…

अभी बुक करें: सामान्य टाइम: 11 से 15 दिसंबर 2019: 10999 रुपये प्रति व्यक्ति (जोधपुर से जोधपुर)

अभी बुक करें: पीक टाइम: 25 से 29 दिसंबर 2019: 15999 रुपये प्रति व्यक्ति (जोधपुर से जोधपुर)

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