फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब ट्रिप (4D/3N) - 4 Days

Valley of Flowers Trek

भले ही मानसून में उत्तराखंड में घूमना खतरनाक माना जाता हो, लेकिन असल बात ये है कि मानसून में ही इस राज्य की असली खूबसूरती निखरकर सामने आती है। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी में इसी सीजन में फूल खिलते हैं, विशेषकर जुलाई के आखिरी सप्ताह और अगस्त के पहले सप्ताह में।
गोविंदघाट कैसे पहुँचें?
हरिद्वार-बद्रीनाथ मार्ग पर हरिद्वार से 295 किलोमीटर और ऋषिकेश से 270 किलोमीटर दूर गोविंदघाट स्थित है। रास्ते में देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चमोली और जोशीमठ नामक स्थान स्थित हैं। इन सभी स्थानों पर रुकने-खाने की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध है। चूँकि आजकल इस मार्ग को चार-लेन में परिवर्तित करने का कार्य चल रहा है, इसलिए यह मार्ग कुछ असुविधाजनक भी हो गया है। बेहतर है कि आप कोटद्वार से पौड़ी और श्रीनगर होते हुए आएँ। ऐसा करने से आपको इस निर्माणाधीन मार्ग पर कुछ कम चलना पड़ेगा और हरिद्वार व ऋषिकेश के ट्रैफिक से भी बचेंगे।
हरिद्वार व ऋषिकेश दोनों ही स्थानों से बद्रीनाथ के लिए सुबह के समय बसें चलती हैं, जो शाम तक आपको गोविंदघाट पहुँचा देंगी।
कुछ जरूरी बातें:

1. ट्रिप के दौरान किसी भी तरह की शराब, बीयर आदि का सेवन करना सख्त मना है। यदि आप ऐसा करते पाए गए, तो आपको अविलंब यात्रा से निष्कासित कर दिया जाएगा और कुछ भी रिफंड नहीं मिलेगा।
2. यह समय मानसून और बारिश का होता है, इसलिए सुरक्षा का अधिक ध्यान रखना होता है। इसकी वजह से यात्रा के कार्यक्रम में बदलाव भी हो सकता है और यात्रा रद्द भी हो सकती है। एक बार यात्रा आरंभ होने के बाद यदि कोई बदलाव होता है, तो आपको उसे मानना होगा और इसका कुछ भी रिफंड नहीं मिलेगा। यदि यात्रा आरंभ होने से पहले हाई अलर्ट आदि के कारण यात्रा रद्द होती है, तो आपको 100% रिफंड दिया जाएगा।
3. अपने घर से गोविंदघाट के रास्ते में भूस्खलन या किसी भी कारण से यदि आप तय समय पर गोविंदघाट नहीं पहुँच सके और यात्रा में भाग नहीं ले सके, तो आपको 25% रिफंड मिलेगा।
4. भूस्खलन, अतिवृष्टि या किसी भी कारण से यदि यात्रा 4 से अधिक दिनों तक होती है, तो इन अतिरिक्त दिनों के रहने-खाने आदि का भुगतान आपको करना होगा।
5. यह यात्रा 1800 मीटर से शुरू होकर 4200 मीटर तक जाती है। आपको अल्प समय में अधिक ऊँचाई पर जाना होता है। ऐसे में हाई माउंटेन सिकनेस का खतरा भी बढ़ जाता है। इसकी शुरूआत वैसे तो हल्के सिरदर्द से होती है, लेकिन अक्सर पैदल चलने का भी मन नहीं करता। आप मन न होने पर भी कुछ दूर तक चल सकते हो, लेकिन यदि आप स्वयं को ऊपर चढ़ने में असमर्थ पाते हैं, तो आपको तुरंत नीचे जाना होगा। यदि आपके बच्चे ऊपर चढ़ने में आनाकानी करते हैं, तो यह माना जाएगा कि उन्हें हाई माउंटेन सिकनेस हो गई है और फिर पूरे परिवार को वापस नीचे जाना होगा। यूँ तो पॉर्टर आसानी से आपको और बच्चों को अपने कंधे पर बैठाकर आगे ले जा सकता है, लेकिन इसमें और ज्यादा हाई माउंटेन सिकनेस होने का खतरा है और हम ऐसा खतरा नहीं उठाएँगे। वापस लौटने में जो भी अतिरिक्त खर्च होगा, वह आपको ही वहन करना होगा। पॉर्टर पूरे दिन आपके साथ रहेगा और हम भी उचित कदम उठाएँगे।
6. आप गोविंदघाट या घांघरिया या बीच रास्ते में कहीं से खच्चर भी ले सकते हैं… खच्चर केवल हेमकुंड साहिब तक ही जाते हैं… फूलों की घाटी में खच्चर नहीं जाते, आपको फूलों की घाटी में पैदल ही जाना होगा… यदि आप खच्चर लेते हैं, तो इसका पूरा खर्च आपको उठाना होगा…
7. न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री तक भी हो सकता है, इसलिए अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट, धूप का चश्मा, सनक्रीम, दस्ताने, अच्छी ग्रिप के जूते, कान ढकने के लिए मफलर या मंकी कैप आदि अवश्य लाएँ।
8. आज से ही कम से कम 5 किलोमीटर पैदल चलना शुरू कर दें।

रिफंड पॉलिसी

  1. यात्रा शुरू होने के 30 दिन से पहले कैंसिल कराने पर 90% रिफंड।
  2. यात्रा शुरू होने के 5 से 30 दिन के बीच कैंसिल कराने पर 50% रिफंड।
  3. उसके बाद कोई रिफंड नहीं मिलेगा।
  4. GST का रिफंड नहीं मिलेगा।

Day 1
दिन-1: गोविंदघाट (1800 मीटर) से घांघरिया (3100 मीटर) (4 किमी सड़क और 10 किमी पैदल)

गोविंदघाट में अलकनंदा नदी पार करके चार किलोमीटर आगे पुलना गाँव तक पक्की सिंगल सड़क बनी है। गाड़ियाँ आसानी से पार्क हो जाती हैं। पुलना से 9-10 किलोमीटर आगे घांघरिया है। बेहतरीन चौड़ी पगडंडी बनी है। पुलना और घांघरिया के ठीक बीच में भ्यूंडार गाँव है। भ्यूंडार में खाने के लिये कई ढाबे हैं, लेकिन ठहरने की सुविधा नहीं है। एक पुलिस चौकी भी है। आपको गोविंदघाट या पुलना से चलकर घांघरिया जाना ही पड़ेगा। गोविंदघाट 1800 मीटर पर, पुलना 2100 मीटर पर, भ्यूंडार 2600 मीटर पर और घांघरिया 3100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं। इसका अर्थ है कि चढ़ाई अच्छी-खासी है और आपको पहले ही दिन 1000 मीटर या उससे भी ज्यादा पैदल चढ़ना पड़ेगा।

Day 2
दिन-2: घांघरिया (3100 मीटर) से फूलों की घाटी (3500 मीटर) और वापस घांघरिया (आना-जाना कम से कम 10 किमी)

घांघरिया से तीन साढ़े तीन किलोमीटर पैदल चलने के बाद आप फूलों की घाटी में प्रवेश कर जाते हैं। ऊँचाई 3500 मीटर है। फिर तो 8-10 किलोमीटर की घाटी आपके लिये खुली है। घांघरिया से निकलते ही वन विभाग की चौकी है। सुबह 7 बजे से प्रवेश कर सकते हैं। दोपहर बारह बजे के बाद किसी को प्रवेश नहीं करने दिया जाता और शाम पाँच बजे तक आपको लौटना पड़ेगा। यदि आप पाँच बजे तक नहीं लौटे, तो वन विभाग के कर्मचारी आपको ढूँढ़ने चल देंगे। फूलों की घाटी में कोई भी रात नहीं रुक सकता।

Day 3
दिन-3: घांघरिया (3100 मीटर) से हेमकुंड साहिब (4200 मीटर) और वापस घांघरिया (आना-जाना लगभग 12 किमी)

घांघरिया से हेमकुंड साहिब की दूरी लगभग 6 किमी है। अच्छा रास्ता बना है और पूरे रास्ते श्रद्धालु आते-जाते मिलते हैं, खासकर सिक्ख श्रद्धालु। चढ़ाई काफी तेज है।

Day 4
दिन-1: घांघरिया से गोविंदघाट वापस

आज का पूरा रास्ता नीचे उतरने का है। गोविंदघाट तक पहुँचने में 5-6 घंटे लगते हैं। वहाँ से आपको हरिद्वार के लिए कोई न कोई गाड़ी मिल सकती है। गोविंदघाट पहुँचते ही हमारी तरफ से ट्रिप समाप्त हो जाएगी।

You can send your inquiry via the form below.

Trip Facts

  • ट्रैकिंग
  • 4
  • 4200 मीटर (13800 फीट)
  • उत्तराखंड